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Monday, February 27, 2017

शरीर में प्राणवायु (ऑक्सीजन) की कमी कैंसर की जड़ ह


*शरीर में प्राणवायु (ऑक्सीजन) की कमी कैंसर की जड़ है* ।
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दुर्भाग्य है की जो बात हमारे ऋषि मुनि हजारो वर्ष पहले लिख कर चले गए वही बात आज यदि कोई नोबल पुरस्कार विजेता बोले तो ही हमे सही लगती है ।

1931 में Otto Warburg को कैंसर के असली कारण की खोज के लिए नोबल पुरस्कार मिला था ।
कैंसर का असली कारण  शरीर में ऑक्सीजन की कमी है ।
- ऑक्सीजन की कमी से शरीर अम्लीय (Acidic) हो जाता है ।
- शोध में यह भी पता चला की कैंसर की कोशिकाएं (Cells) अवायवीय अर्थात ऑक्सीजन के बिना जीवित रहने वाली (Anaerobic - Which Do not breath Oxygen) होती है ।

- जिस शरीर में ऑक्सीजन अधिक होगी वहां कैंसर की कोशिकाए जीवित नहीं रह सकती ।
- और जिस शरीर में ऑक्सीजन अधिक होगी वह शरीर क्षारीय होगा ।
- क्षारीय शरीर में कैंसर या कोई और बीमारी नहीं आ सकती है ।
- सामान्य कोशिकाएं ऑक्सीजन के बिना जीवित नहीं रह सकती परन्तु कैंसर की कोशिकाए बिना किसी अपवाद के ऑक्सीजन की कमी के बाद भी जीवित  रह सकती है ।

      यदि एक कोशिका को 48 घंटे तक आवश्यकता से 35% कम ऑक्सीजन देते रहो तो  बहुत सम्भावना है की वो कैंसरकारक कोशिका में बदल जाएगी ।

हमारा खानपान ही हमारे शरीर को क्षारीय और अम्लीय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है ।

pH स्तर क्या है?
pH स्तर यदि 7 से अधिक है तो क्षारीय है परन्तु यदि
pH स्तर यदि 7 से नीचे है तो अम्लीय होता है ।
इसलिए शरीर को जीवित रहने के लिए एक आदर्श pH स्तर (7.365) बनाये रखता है जो की थोडा क्षारीय है
दुर्भाग्य से आज हमारे खान पान में अधिकतर भोजन ऐसा है जो हमारे शरीर के pH को अम्लीय बनाता है
जिसमे मुख्य रिफाइंड तेल है।
pH स्तर की यही गड़बड़ी से शरीर को बहुत हानि पहुचती है । जिससे अधिक अम्लीय pH स्तर वाले शरीर में कैंसर, ह्रदय रोग, मधुमेह, हड्डी, सीने में जलन आदि रोग होते है ।

अधिक समय तक अम्लीय शरीर रहने पर बुढ़ापा जल्दी आता है ,  क्योंकि परजीवी, बुरा बैक्टीरिया, वायरस, और फंगस आदि अम्लीय वातावरण में अधिक पनपते है , परन्तु क्षारीय वातावरण इनके लिए मृत्यु है ।
महानगरो में प्रदुषण के कारण वातावरण में ऑक्सीजन की उपस्थिति 21% से कम ही बची है  और  उस पर गलत खानपान रिफाईनड तेल तथा पांम आंयल आदि के कारण शरीर में अम्लता और वातावरण में उपस्थित कम ऑक्सीजन के कारण घर घर में कैंसर बढता जा रहा है ।
अतः रिफाईनड छोड कर सिर्फ कच्ची घाणी का तेल ही इस्तेमाल करना चाहिए।

यदि कोई अम्लीय भोजन करना हो तो प्रातः काल में थोडा बहुत कर ले, परन्तु रात के भोजन में या बेहतर होगा यदि 9 बजे के बाद किसी भी प्रकार का अम्लीय भोजन से बचे ।
*************************** । आक्सीजन निर्माण के स्त्रोत..

- *छाछ* :- देशी गौमाता के दूध की छाछ (दही से मक्खन निकलने के बाद बचा पदार्थ) प्रातः काल पीने से शरीर को भरपूर प्राणवायु मिलती है  इसमें लगभग 30 % आक्सीजन मिलती है ।

- *गौ-भस्म* :-  देसी गाय के गोबर से बनी भस्म में लगभग 43% ऑक्सीजन मिलती है जिसे पानी में मिलाकर पीने से प्राणवायु का संचार शरीर में होता है ।

- *देशी घृत और तिल का तेल* :- 10 ग्राम देशी गाय के घी को या तिल का तेल से दीपक में या हवन में जलाने से 1000 किलो ऑक्सीजन बनती है जो यदि शरीर में जाएगी तो कैंसर सेल्स को पनपने नहीं देती है ।इस लिए सभी देवी देवताओं को तिल के तेल या घी का दीपक जलाया जाता है और हवन में तिल, जौ, अक्षत के साथ घी से हवन किया जाता है। ******* अगर आपको यह article उपयोगी लगा हो तो कृपया इसे अपने मित्रो , रिश्तेदारो और ग्रुपस मे अवश्य शेयर करें।  www.brahmaastha.blogspot.com

पृथ्वी का अमृत.. तिल का तेल


पृथ्वी का अमृत.. तिल का तेल.
यदि इस पृथ्वी पर उपलब्ध सर्वोत्तम खाद्य पदार्थों की बात की जाए तो तिल के तेल का नाम अवश्य आएगा और यही सर्वोत्तम पदार्थ बाजार में उपलब्ध नहीं है. और ना ही आने वाली पीढ़ियों को इसके गुण पता हैं. क्योंकि नई पीढ़ी तो टी वी के इश्तिहार देख कर ही सारा सामान ख़रीदती है.
और तिल के तेल का प्रचार कंपनियाँ इसलिए नहीं करती क्योंकि इसके गुण जान लेने के बाद आप उन द्वारा बेचा जाने वाला तरल चिकना पदार्थ जिसे वह तेल कहते हैं लेना बंद कर देंगे.
तिल के तेल में इतनी ताकत होती है कि यह पत्थर को भी चीर देता है. प्रयोग करके देखें.... आप पर्वत का पत्थर लिजिए और उसमे कटोरी के जैसा खडडा बना लिजिए, उसमे पानी, दुध, धी या तेजाब संसार में कोई सा भी कैमिकल, ऐसिड डाल दीजिए, पत्थर में वैसा की वैसा ही रहेगा, कही नहीं जायेगा... लेकिन... अगर आप ने उस कटोरी नुमा पत्थर में तिल का तेल डाल दीजिए, उस खड्डे में भर दिजिये.. 2 दिन बाद आप देखेंगे कि, तिल का तेल... पत्थर के अन्दर भी प्रवेश करके, पत्थर के नीचे आ जायेगा. यह होती है तेल की ताकत, इस तेल की मालिश करने से हड्डियों को पार करता हुआ, हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है. तिल के तेल के अन्दर फास्फोरस होता है जो कि हड्डियों की मजबूती का अहम भूमिका अदा करता है.
और तिल का तेल ऐसी वस्तु है जो अगर कोई भी भारतीय चाहे तो थोड़ी सी मेहनत के बाद आसानी से प्राप्त कर सकता है. तब उसे किसी भी कंपनी का तेल खरीदने की आवश्यकता ही नही होगी. तिल खरीद लीजिए और किसी भी तेल निकालने वाले से उनका तेल निकलवा लीजिए. लेकिन सावधान तिल का तेल सिर्फ कच्ची घाणी (लकडी की बनी हुई) का ही प्रयोग करना चाहिए.
तैल शब्द की व्युत्पत्ति तिल शब्द से ही हुई है। जो तिल से निकलता वह है तैल। अर्थात तेल का असली अर्थ ही है "तिल का तेल".
तिल के तेल का सबसे बड़ा गुण यह है की यह शरीर के लिए आयुषधि का काम करता है.. चाहे आपको कोई भी रोग हो यह उससे लड़ने की क्षमता शरीर में विकसित करना आरंभ कर देता है. यह गुण इस पृथ्वी के अन्य किसी खाद्य पदार्थ में नहीं पाया जाता.
सौ ग्राम सफेद तिल 1000 मिलीग्राम कैल्शियम प्राप्त होता हैं। बादाम की अपेक्षा तिल में छः गुना से भी अधिक कैल्शियम है।
काले और लाल तिल में लौह तत्वों की भरपूर मात्रा होती है जो रक्तअल्पता के इलाज़ में कारगर साबित होती है।
तिल में उपस्थित लेसिथिन नामक रसायन कोलेस्ट्रोल के बहाव को रक्त नलिकाओं में बनाए रखने में मददगार होता है।
तिल के तेल में प्राकृतिक रूप में उपस्थित सिस्मोल एक ऐसा एंटी-ऑक्सीडेंट है जो इसे ऊँचे तापमान पर भी बहुत जल्दी खराब नहीं होने देता। आयुर्वेद चरक संहित में इसे पकाने के लिए सबसे अच्छा तेल माना गया है।
तिल में विटामिन  सी छोड़कर वे सभी आवश्यक पौष्टिक पदार्थ होते हैं जो अच्छे स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक होते हैं। तिल विटामिन बी और आवश्यक फैटी एसिड्स से भरपूर है।
इसमें मीथोनाइन और ट्रायप्टोफन नामक दो बहुत महत्त्वपूर्ण एमिनो एसिड्स होते हैं जो चना, मूँगफली, राजमा, चौला और सोयाबीन जैसे अधिकांश शाकाहारी खाद्य पदार्थों में नहीं होते। ट्रायोप्टोफन को शांति प्रदान करने वाला तत्व भी कहा जाता है जो गहरी नींद लाने में सक्षम है। यही त्वचा और बालों को भी स्वस्थ रखता है। मीथोनाइन लीवर को दुरुस्त रखता है और कॉलेस्ट्रोल को भी नियंत्रित रखता है।
तिलबीज स्वास्थ्यवर्द्धक वसा का बड़ा स्त्रोत है जो चयापचय को बढ़ाता है।
यह कब्ज भी नहीं होने देता।
तिलबीजों में उपस्थित पौष्टिक तत्व,जैसे-कैल्शियम और आयरन त्वचा को कांतिमय बनाए रखते हैं।
तिल में न्यूनतम सैचुरेटेड फैट होते हैं इसलिए इससे बने खाद्य पदार्थ उच्च रक्तचाप को कम करने में मदद कर सकता है।
सीधा अर्थ यह है की यदि आप नियमित रूप से स्वयं द्वारा निकलवाए हुए शुद्ध तिल के तेल का सेवन करते हैं तो आप के बीमार होने की संभावना ही ना के बराबर रह जाएगी. जब शरीर बीमार ही नही होगा तो उपचार की भी आवश्यकता नही होगी. यही तो आयुर्वेद है.. आयुर्वेद का मूल सीधांत यही है की उचित आहार विहार से ही शरीर को स्वस्थ रखिए ताकि शरीर को आयुषधि की आवश्यकता ही ना पड़े.
एक बात का ध्यान अवश्य रखिएगा की बाजार में कुछ लोग तिल के तेल के नाम पर अन्य कोई तेल बेच रहे हैं.. जिसकी पहचान करना मुश्किल होगा. ऐसे में अपने सामने निकाले हुए तेल का ही भरोसा करें. यह काम थोड़ा सा मुश्किल ज़रूर है किंतु पहली बार की मेहनत के प्रयास स्वरूप यह शुद्ध तेल आपकी पहुँच में हो जाएगा. जब चाहें जाएँ और तेल निकलवा कर ले आएँ.

तिल में मोनो-सैचुरेटेड फैटी एसिड (mono-unsaturated fatty acid) होता है जो शरीर से बैड कोलेस्ट्रोल को कम करके गुड कोलेस्ट्रोल यानि एच.डी.एल. (HDL) को बढ़ाने में मदद करता है। यह हृदय रोग, दिल का दौरा और धमनीकलाकाठिन्य (atherosclerosis) के संभावना को कम करता है।
कैंसर से सुरक्षा प्रदान करता है-
तिल में सेसमीन (sesamin) नाम का एन्टीऑक्सिडेंट (antioxidant) होता है जो कैंसर के कोशिकाओं को बढ़ने से रोकने के साथ-साथ है और उसके जीवित रहने वाले रसायन के उत्पादन को भी रोकने में मदद करता है। यह फेफड़ों का कैंसर, पेट के कैंसर, ल्यूकेमिया, प्रोस्टेट कैंसर, स्तन कैंसर और अग्नाशय के कैंसर के प्रभाव को कम करने में बहुत मदद करता है।
तनाव को कम करता है-
इसमें नियासिन (niacin) नाम का विटामिन होता है जो तनाव और अवसाद को कम करने में मदद करता है।
हृदय के मांसपेशियों को स्वस्थ रखने में मदद करता है-
तिल में ज़रूरी मिनरल जैसे कैल्सियम, आयरन, मैग्नेशियम, जिन्क, और सेलेनियम होता है जो हृदय के मांसपेशियों को सुचारू रूप से काम करने में मदद करता है और हृदय को नियमित अंतराल में धड़कने में मदद करता है।
शिशु के हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है-
तिल में डायटरी प्रोटीन और एमिनो एसिड होता है जो बच्चों के हड्डियों के विकसित होने में और मजबूती प्रदान करने में मदद करता है। उदाहरणस्वरूप 100ग्राम तिल में लगभग 18 ग्राम प्रोटीन होता है, जो बच्चों के विकास के लिए बहुत ज़रूरी होता है।
गर्भवती महिला और भ्रूण (foetus) को स्वस्थ रखने में मदद करता है-
तिल में फोलिक एसिड होता है जो गर्भवती महिला और भ्रूण के विकास और स्वस्थ रखने में मदद करता है।
शिशुओं के लिए तेल मालिश के रूप में काम करता है-
अध्ययन के अनुसार तिल के तेल से शिशुओं को मालिश करने पर उनकी मांसपेशियाँ सख्त होती है साथ ही उनका अच्छा विकास होता है। आयुर्वेद के अनुसार इस तेल से मालिश करने पर शिशु आराम से सोते हैं।
अस्थि-सुषिरता (osteoporosis) से लड़ने में मदद करता है-
तिल में जिन्क और कैल्सियम होता है जो अस्थि-सुषिरता से संभावना को कम करने में मदद करता है।
मधुमेह के दवाईयों को प्रभावकारी बनाता है-
डिपार्टमेंट ऑफ बायोथेक्सनॉलॉजी विनायक मिशन यूनवर्सिटी, तमिलनाडु (Department of Biothechnology at the Vinayaka Missions University, Tamil Nadu) के अध्ययन के अनुसार यह उच्च रक्तचाप को कम करने के साथ-साथ इसका एन्टी ग्लिसेमिक प्रभाव रक्त में ग्लूकोज़ के स्तर को 36% कम करने में मदद करता है जब यह मधुमेह विरोधी दवा ग्लिबेक्लेमाइड (glibenclamide) से मिलकर काम करता है। इसलिए टाइप-2 मधुमेह (type 2 diabetic) रोगी के लिए यह मददगार साबित होता है।
दूध के तुलना में तिल में तीन गुना कैल्शियम रहता है। इसमें कैल्शियम, विटामिन बी और ई, आयरन और ज़िंक, प्रोटीन की भरपूर मात्रा रहती है और कोलेस्टरोल बिल्कुल नहीं रहता है। तिल का तेल ऐसा तेल है, जो सालों तक खराब नहीं होता है, यहाँ तक कि गर्मी के दिनों में भी वैसा की वैसा ही रहता है.
तिल का तेल कोई साधारण तेल नहीं है। इसकी मालिश से शरीर काफी आराम मिलता है। यहां तक कि लकवा जैसे रोगों तक को ठीक करने की क्षमता रखता है। इससे अगर आप महिलाएं अपने स्तन के नीचे से ऊपर की ओर मालिश करें, तो स्तन पुष्ट होते हैं। सर्दी के मौसम में इस तेल से शरीर की मालिश करें, तो ठंड का एहसास नहीं होता। इससे चेहरे की मालिश भी कर सकते हैं। चेहरे की सुंदरता एवं कोमलता बनाये रखेगा। यह सूखी त्वचा के लिए उपयोगी है।
तिल का तेल- तिल विटामिन ए व ई से भरपूर होता है। इस कारण इसका तेल भी इतना ही महत्व रखता है। इसे हल्का गरम कर त्वचा पर मालिश करने से निखार आता है। अगर बालों में लगाते हैं, तो बालों में निखार आता है, लंबे होते हैं।
जोड़ों का दर्द हो, तो तिल के तेल में थोड़ी सी सोंठ पावडर, एक चुटकी हींग पावडर डाल कर गर्म कर मालिश करें। तिल का तेल खाने में भी उतना ही पौष्टिक है विशेषकर पुरुषों के लिए।इससे मर्दानगी की ताकत मिलती है!
हमारे धर्म में भी तिल के बिना कोई कार्य सिद्ध नहीं होता है, जन्म, मरण, परण, यज्ञ, जप, तप, पित्र, पूजन आदि में तिल और तिल का तेल के बिना संभव नहीं है अतः इस पृथ्वी के अमृत को अपनायें और जीवन निरोग बनायें। ******* अगर आपको यह article उपयोगी लगा हो तो कृपया इसे अपने मित्रो , रिश्तेदारो और ग्रुपस मे अवश्य शेयर करें।  www.brahmaastha.blogspot.com

भोजन द्वारा स्वास्थ्य


*भोजन द्वारा स्वास्थ्य*

केला ::-
        ब्लडप्रेशर नियंत्रित करता है,
        हड्डियों को मजबूत बनाता है,
        हृदय की सुरक्षा करता है,
        अतिसार  में लाभदायक है,
        खांसी में हितकारी है।

जामुन ::- 
        केन्सर की रोक थाम ,
        हृदय की सुरक्षा,
        कब्ज मिटाता है,
        स्मरण शक्ति बढाता है,
        रक्त शर्करा नियंत्रित करता है,
        डायबीटीज में अति लाभदायक।

सेवफ़ल ::-
        हृदय की सुरक्षा करता है,
        दस्त रोकता है,
        कब्ज में फ़ायदेमंद है,
        फ़ेफ़डे की शक्ति बढाता है।

चुकंदर ::-
        वजन घटाता है,
        ब्लडप्रेशर नियंत्रित करता है,
        अस्थिक्छरण रोकता है,
        केंसर के विरुद्ध लडता है,
        हृदय की सुरक्षा करता है।

पत्ता गोभी ::-
       बवासीर में हितकारी है,
       हृदय रोगों में लाभदायक है,
       कब्ज मिटाता है,
       वजन घटाने  में सहायक है,
       केंसर में फ़ायदेमंद है।

गाजर ::-
       नेत्र ज्योति वर्धक है,
       केंसर प्रतिरोधक है,
       वजन घटाने में सहायक है,
       कब्ज मिटाता है,
       हृदय की सुरक्षा करता है।

फूल गोभी ::-
        हड्डियों को मजबूत बनाता है,
        स्तन केंसर से बचाव करता है,
        प्रोस्टेट ग्रंथि के केंसर में भी उपयोगी,
        चोंट, खरोंच ठीक करता है।

लहसुन:
        कोलेस्टरोल घटाती है,
        रक्त चाप घटाती है,
        कीटाणुनाशक है,
        केंसर से लडती है।

शहद ::-
       घाव भरने में उपयोगे है,
       पाचन क्रिया सुधारती है,
       एलर्जी रोगों में उपकारी है,
       अल्सर से मुक्तिकारक है,
       तत्काल स्फ़ूर्ती देती है।

नींबू ::-
       त्वचा को मुलायम बनाता है,
       केंसर अवरोधक है,
       हृदय की सुरक्षा करता है,
       ब्लड प्रेशर नियंत्रित करता है,
       स्कर्वी रोग नाशक है।

अंगूर ::-
        रक्त प्रवाह वर्धक है,
        हृदय की सुरक्षा करता है,
        केंसर से लडता है,
        गुर्दे की पथरी नष्ट करता है,
        नेत्र ज्योति वर्धक है।

आम ::-
        केंसर से बचाव करता है,
        थायराईड रोग में हितकारी है,
        पाचन शक्ति बढाता है,
        याददाश्त की कमजोरी में हितकर।

प्याज ::-
        फ़ंगस रोधी गुण हैं,
        हार्ट अटेक की रिस्क को कम करे,
        जीवाणु नाशक है,
        केंसर विरोधी है,
        खराब कोलेस्टरोल को घटाना।

अलसी के बीज ::-
        मानसिक शक्ति वर्धक है,
        रोग प्रतिकारक शक्ति को ताकत दे,
        डायबीटीज में उपकारी है,
        हृदय की सुरक्षा करता है,
        डायजेशन को ठीक करता है।

संतरा ::-
       हृदय की सुरक्षा करता है,
       रोग प्रतिकारक शक्ति उन्नत होना,
       श्वसन पथ के विकारों में लाभकारी,
       केंसर में हितकारी है।

टमाटर ::-
       कोलेस्टरोल कम करता है,
       प्रोस्टेट ग्रंथि के स्वास्थ्य के लिये उपकारी,
       केंसर से बचाव करता है,
       हृदय की सुरक्षा करता है।

पानी ::-
       गुर्दे की पथरी नाशक है,
       वजन घटाने में सहायक है,
       केंसर के विरुद्ध लडता है,
       त्वचा के चमक बढाता है।

अखरोट ::-
        मूड उन्नत करन में सहायक है,
        मेमोरी  पावर बढाता है,
        केंसर से लड सकता है,
        हृदय रोगों से बचाव करता है,
        कोलेस्टरोल घटाने मेँ मददगार है।

तरबूज ::-
       स्ट्रोक रोकने में उपयोगी है,
       प्रोस्टेट के स्वास्थ्य के लिये हितकारी है,
       रक्तचाप घटाता है,
       वजन कम करने में सहायक है

अंकुरित गेहूं ::-
       बडी आंत की केंसर से लडता है,
       कब्ज प्रतिकारक है,
       स्ट्रोक से रक्षा करता है,
       कोलेस्टरोल कम करता है,
       पाचन सुधारता है।

चावल ::-
       किडनी स्टोन में हितकारी है,
       डायबीटीज में लाभदायक है,
       स्ट्रोक से बचाव करता है,
       केंसर से लडता है,
       हृदय की सुरक्षा करता है।

आलू बुखारा ::-
        हृदय रोगों से बचाव करता है,
        बुढापा जल्द आने से रोकता है,
        याददाश्त बढाता है,
        कोलेस्टरोल घटाता है,
        कब्ज प्रतिकारक है।

पाइनेपल ::-
       अतिसार (दस्त) रोकता है,
       वार्ट्स (मस्से) ठीक करता है,
       सर्दी, ठंड से बचाव करता है,
       अस्थि क्छरण रोकता है ,
       पाचन सुधारता है।

जौ , जई  ::-
        कोलेस्टरोल घटाता है,
        केंसर से लडता है,
        डायबीटीज में उपकारी है,
        कब्ज प्रतिकारक् है ,
        त्वचा पर शाईनिंग लाता है।

अंजीर  ::-
        रक्त चाप नियंत्रित करता है,
        स्ट्रोक्स से बचाता है,
        कोलेस्टरोल कम करता है,
        केंसर से लडता है,
        वजन घटाने में सहायक है।

शकरकंद ::-
       आंखों की रोशनी बढाता है,
       मूड उन्नत करता है,
       हड्डिया बलवान बनाता है,
       केंसर से लडता है ।
      
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Sunday, February 26, 2017

अगर आप हमेशा जवां दिखाई देना चाहते ह"


गर्म पानी में हल्दी, नींबू मिला
कर पीने के फायदे :-.
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*1.अगर आप हमेशा जवां दिखाई देना चाहते हैं, तो यह मिश्रण ज़रूर पिए. नींबू हल्दी वाला पानी पीने से इनमे मौज़ूद तत्व फ्री रेडिकल्स से लड़ते हैं.इसलिए इसका सेवन करने से आपकी स्किन पर बढ़ती उम्र का प्रभाव नही पड़ता हैं. *2.हल्दी वाला पानी पीने से खून नही जमता हैं और खून की धमनियो में किसी भी तरह की कोई रूकावट नही होती हैं.*3. इन तीनो को मिक्स करके पीने से कैंसर से बचा जा सकता हैं. क्योंकि इससे आपको करक्यूमिन नाम का एंटीऑक्सीडेंट की प्राप्ति होती हैं, जो कैंसर पैदा करने वाले सेल्स से लड़ने में सहायता करता हैं.*4. इस मिश्रण को पीने से शरीर में ब्लड सर्क्युलेशन सही तरह से होता हैं. साथ ही इससे खून साफ़ करने में भी मदद मिलती हैं.*5.करक्यूमिन होने के कारण यह जोड़ो के दर्द को दूर करने में सहायता करता हैं. यह दर्द निवारक दवाईओं से भी बेहतर तरह से काम करता हैं.इसलिए अगर आपको आर्थराइटिस या जोड़ो में दर्द की शिकायत रहती हैं, तो इस हल्दी नींबू वाले पानी का सेवन ज़रूर करे.*6.आपकी बॉडी में कंही भी सूजन या कितनी भी ज़्यादा सूजन क्यों ना हो यह नींबू हल्दी वाला पानी पीने से सूजन को कम किया जा सकता हैं. क्योंकि इसमे करक्यूमिन नाम का एंटीऑक्सीडेंट होता हैं जो सूजन को कम करने के लिए दवाई की तरह काम करता हैं. *7.अगर आप अपने शरीर की चर्बी को कम करना चाहते हैं तो गर्म पानी में नींबू, हल्दी पाउडर और शहद मिला कर पीजिए. यह पेय आपके शरीर से ज़हरीले तत्वो को बाहर निकालने में बहुत मदद करता हैं, जिस वजह से आप अपने मोटापे को बड़ी ही आसानी के साथ कम कर सकते हैं. *8.इस ड्रिंक को पीने से दिमाग़ को बहुत लाभ मिलता हैं. इसे आप डेमेंटिया और अल्जाइमर जैसी भूलने की बीमारी को कम कर सकते हैं. यह स्वस्थ्य मष्तिक के लिए एक अच्छा पेय माना गया हैं. *9.हल्दी वाला पानी लिवर की सुरक्षा करता हैं. खराब हो चुके लिवर सेल्स को दुबारा से ठीक करने में मदद करता हैं. यह पित्तासय के काम को ठीक करने में सहायता करता हैं. *10.रिसर्च यह बताते हैं की हल्दी के सेवन से पित्त ज़्यादा बनता हैं, जिस वजह से खाने को जल्दी हजम करने में सहायता मिलती हैं. तो वही नींबू को पाचन तंत्र के लिए काफ़ी फायदेमंद माना गया हैं.*11.हल्दी के नियमित सेवन से ग्लूकोज का लेवल कम हो जाता है ***** अगर आपको यह article उपयोगी लगा हो तो कृपया इसे अपने दोस्तो के साथ शेयर कीजिये।  Aastha Clinic Samana. *****

Eating Fruit on Empty Stomach


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  *Eating Fruit on Empty Stomach*

This will open your eyes ! Read to the end; and then, send it to others on your list as I just did to u!

Dr Stephen Mak treats terminal ill cancer patients by an "un-orthodox" way and many patients recovered.

Before he used solar energy to clear the illnesses of his patients, he believes on natural healing in the body against illnesses. See his article below.

It is one of the strategies to heal cancer. As of late, my success rate in curing cancer is about 80%.

Cancer patients shouldn't die. The cure for cancer is already found - *its in the way we eat fruits.*

It is whether you believe it or not.

I am sorry for the hundreds of cancer patients who die under the conventional treatments.

*EATING FRUIT*

We all think eating fruits means just buying fruits, cutting it and just popping it into our mouths.

It's not as easy as you think. It's important to know how and *when* to eat the fruits.

What is the correct way of eating fruits?

*IT MEANS NOT EATING FRUITS AFTER YOUR MEALS!*
5
*FRUITS SHOULD BE EATEN ON AN EMPTY STOMACH*

If you eat fruits on empty stomach, it will play a major role to detoxify your system, supplying you with a great deal of energy for weight loss and other life activities.

_FRUIT IS THE MOST IMPORTANT FOOD._

Let's say you eat two slices of bread and then a slice of fruit.

The slice of fruit is ready to go straight through the stomach into the intestines, but it is prevented from doing so due to the bread taken before the fruit.

In the meantime the whole meal of bread & fruit rots and ferments and turns to acid.

The minute the fruit comes into contact with the food in the stomach and digestive juices, the entire mass of food begins to spoil.

So please eat your fruits on an *empty stomach* *or before your meals !*

You have heard people complaining :

Every time I eat watermelon I burp, when I eat durian my stomach bloats up, when I eat a banana I feel like running to the toilet, etc.. etc..

Actually all this will not arise if you eat the fruit on _an empty stomach._

The fruit mixes with the putrefying of other food and produces gas and hence you will bloat !

Greying hair, balding, nervous outburst and dark circles under the eyes all these will *NOT* *happen if you take fruits on an empty stomach.*

There is no such thing as some fruits, like orange and lemon are acidic, because all fruits become alkaline in our body, according to Dr. Herbert Shelton who did research on this matter.

If you have mastered the correct way of eating fruits, you have the  *SECRET of beauty, longevity, health, energy, happiness and normal weight.*

When you need to drink fruit juice - *drink only  fresh fruit juice,* NOT from the cans, packs or bottles.

Don't even drink juice that has been heated up.

Don't eat cooked fruits because you don't get the nutrients at all.

You only get its taste.
Cooking destroys all the vitamins.

But eating a whole fruit is better than drinking the juice.

If you should drink the fresh fruit juice, drink it mouthful by mouthful slowly, because you must let it mix with your saliva before swallowing it.

You can go on a 3-day fruit fast to cleanse or detoxify your body.

Just eat fruits and drink fresh fruit juice throughout the 3 days.

And you will be surprised when your friends tell you how radiant you look !

*KIWI fruit:*
Tiny but mighty.
This is a good source of potassium, magnesium, vitamin E & fiber. Its vitamin C content is twice that of an orange.

*APPLE:*
An apple a day keeps the doctor away?
Although an apple has a low vitamin C content, it has antioxidants & flavonoids which enhances the activity of vitamin C thereby _helping to lower the risks of colon cancer, heart attack & stroke._

*STRAWBERRY:*
Protective Fruit.
Strawberries have the highest total antioxidant power among major fruits & protect the body from cancer-causing, blood vessel-clogging and free radicals.

*ORANGE :*
Sweetest medicine.
Taking 2-4 oranges a day may _help keep colds away, lower cholesterol, prevent & dissolve kidney stones as well as lessens the risk of colon cancer._

*WATERMELON:*
Coolest thirst quencher. Composed of 92% water, it is also packed with a giant dose of glutathione, which _helps boost our immune system._

They are also *a key source of lycopene the cancer fighting oxidant.*
Other nutrients found in watermelon are vitamin C & Potassium.

*GUAVA & PAPAYA:*
Top awards for vitamin C. They are the clear winners for their high vitamin C content.

Guava is also rich in fiber, which _helps prevent constipation._

Papaya is rich in carotene; this is _good for your eyes._

*Drinking COLD water or drinks after a meal = CANCER*

Can you believe this ?

For those who like to drink cold water or cold drinks, this article is applicable to you.

It is nice to have a cup of cold water or cold drinks after a meal.

*However, the cold water or drinks will solidify the oily stuff that you have just eaten.*

*It will slow down the digestion.*

*Once this 'sludge' reacts with the acid, it will break down and be absorbed by the intestine faster than the solid food.*

*It will line the intestine.*

*Very soon, this will turn into FATS and lead to CANCER !*

_*It is best to drink hot soup or warm water after a meal.*_

Let's be careful and be aware. The more we know the better chance we could survive.
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